Sandeep Kumar

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लेखनी प्रतियोगिता -13-Feb-2024

फूल को फूल देकर मैं भूल नहीं कर सकता
ऐसे ही पश्चिम सभ्यता को मैं कबूल नहीं कर सकता
माना कि उसके लिए फलाना ठिकाना डे होता है
लेकिन हमारे लिए तो हर दिन भगवान का दिन होता है।।

तो फिर मैं क्यों एक डे को निश्चित डे करूं
उस डे की डी में फूल को कल्पित करूं
ऐसा भूल मैं नहीं कर सकता
हर दिन खुशियों का दिन है हम भारतीय हर दिन खुशियां है मनाता।।

हग डे फग डे तक डे कुछ भी नहीं है  होता 
पश्चिमी सभ्यता वाले मुफ्त में है भ्रम फैलता
क्योंकि उसे अपना रोटी सेकना है इसकी आड में 
और दूसरे को बात बात पर नीचा है दिखाना।।

संदीप कुमार अररिया बिहार

प्रतियोगिता हेतु 

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6 Comments

Gunjan Kamal

16-Feb-2024 11:46 PM

बहुत खूब

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Sandeep Kumar

17-Feb-2024 02:09 PM

Thank you

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Mohammed urooj khan

15-Feb-2024 11:43 AM

👌🏾👌🏾👌🏾

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Sandeep Kumar

17-Feb-2024 02:09 PM

Thank you

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बहुत खूब

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Sandeep Kumar

14-Feb-2024 09:38 AM

Thank you

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